About Trust

आज राष्ट्र में चारों ओर निराशा का वातावरण व्याप्त है। देश का युवा वर्ग अपने को असहाय एवं अशांत महसूस कर रहा है। देश में साधान एवं सेवा का स्तर घटा हुआ है। जबकि प्राचीन भारत सभी दृष्टियों से सम्पूर्ण विश्व में अग्रणी था, लेकिन आज भारतवर्ष में विश्व के सर्वाधिक गरीब व असहाय परिवारों के बच्चे कुष्ठ रोग, अशिक्षित जन, कुपोषण के शिकार बालक-बालिकायें, विकलांग, अंधे, जंगली व मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग हमारे समाज की उपेक्षा के कारण नारकीय पशुवत जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। इस राष्ट्र का लगभग 60 प्रतिशत ग्रामीण आज भी मूलभूत जन सुविधाओं से वंचित है। इसके साथ-साथ समाज में विघटन एवं संयुक्त परिवारों की कमी के चलते गरीब व असहाय बालिकाओं के सुयोग्य वर को ढूंढने में भी दिक्कत आ रही है, जिस कारण अधिकतर गरीब व असहाय कन्याओं को अकेले जीवन जीना पड़ता है व गरीब तथा खस्ताहाली के चलते एवं युवाओं को उचित अवसर न मिलने के कारण समाज के बालक-बालिकाओं में प्रतिभाएं दबी रह जाती हैं, साथ ही आज के परिवेश में कला, संस्कृति व प्रदेशों की लोकसंस्कृति लुप्त हो रही है।
आज के निराशावादी परिवेश में युवाओं का दृढ़ संकल्प एवं आत्मबल ही राष्ट्र को पुन: विश्व रंगमंच पर सर्वोच्चतम रूप में स्थापित कर सकता है।
उपरोक्त धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक जैसे कार्यों एवं गरीब व असहाय लोगों के बालक-बालिकाओं के सपने साकार एवं सर्वांगीण विकास के लिए समाज के बुद्धिजीवी, समाज सेवा का जज्बा और सकारात्मक सोच रखने वालों के सहयोग से यशबाबू चैरिटेबल ट्रस्ट गठन का पवित्र संकल्प लिया गया है,